किसान पंजीकरण अभियान में तकनीकी और कागजी बाधाएं
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत चलाए जा रहे ‘फार्मर रजिस्ट्री’ अभियान में किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, लगभग ६०% से ज्यादा किसानों का पंजीकरण अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। तकनीकी बाधाओं और कागजी अड़चनों की वजह से किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिन किसानों का पंजीकरण और ई-केवाईसी पूरा नहीं होगा, उन्हें २२वीं किस्त का लाभ नहीं मिल पाएगा।
जमीन की जमाबंदी बनी सबसे बड़ी समस्या
नए नियमों के अनुसार, केवल उन्हीं किसानों का पंजीकरण स्वीकार किया जा रहा है जिनके नाम पर जमीन की जमाबंदी दर्ज है। जिले में बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं जो वर्षों से खेती कर रहे हैं, लेकिन जमीन आज भी उनके पिता, दादा या पूर्वजों के नाम पर है। ऐसे किसानों को विशेष शिविरों से यह कहकर लौटाया जा रहा है कि पहले जमीन अपने नाम पर म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) कराएं। अंचल कार्यालयों में म्यूटेशन की फाइलें महीनों से लंबित होने के कारण किसानों में भारी असंतोष है।
ई-केवाईसी न होने पर सूची से कटेगा नाम
योजना का लाभ जारी रखने के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। पंचायत स्तर पर लगाए जा रहे शिविरों में नए पंजीकरण के साथ-साथ पुराने लाभार्थियों का सत्यापन भी किया जा रहा है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी पाई गई या ई-केवाईसी की प्रक्रिया अधूरी रही, तो लाभार्थी का नाम सूची से हटाया जा सकता है। इस डर से किसान बड़ी संख्या में शिविरों में पहुँच रहे हैं, लेकिन काम की गति धीमी होने के कारण कई किसानों को घंटों कतार में खड़े होने के बाद खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
बढ़ती लागत के बीच सम्मान निधि ही सहारा
किसानों का कहना है कि खेती की बढ़ती लागत, खाद, बीज और डीजल के बढ़ते दामों के बीच पीएम किसान सम्मान निधि ही उनकी आर्थिक जरूरतों का मुख्य सहारा है। ऐसे में तकनीकी अड़चनों की वजह से योजना से बाहर होना उनके लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर सकता है। प्रशासन की ओर से प्रति पंचायत प्रतिदिन केवल २५ से ३० किसानों का ही पंजीकरण पूरा हो पा रहा है, जो किसानों की कुल संख्या के मुकाबले बहुत कम है।